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ईरान ने इजरायल को दी खुली धमकी, कहा- हमपर हमला करने से पहले अपनी ताकत जांच लेना

तेहरान ईरान और इजरायल में जारी तनाव के बीच धमकियों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने अप...

तेहरान

ईरान और इजरायल में जारी तनाव के बीच धमकियों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन के प्रमुख मोहम्मद एस्लामी ने अपने परमाणु केंद्रों पर हमले की धमकी को लेकर इजरायल को खुली चेतावनी दी है। उन्होंने यमनी टेलीविजन नेटवर्क अल-मसीरा को दिए इंटरव्यू में कहा कि इजरायल पहले खुद को आईने में देखे और धमकी देने से पहले अपनी क्षमताओं की जांच कर ले।


ईरानी सुरक्षा परिषद के चीफ ने भी धमकाया

इससे पहले ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली शामखानी ने धमकी देते हुए कहा था कि अगर इजरायल इस्लामिक गणराज्य पर हमला करने की हिम्मत करता है तो उसे गंभीर आर्थिक कीमत चुकानी पड़ेगी। शामखानी ने ट्वीट कर कहा था कि ईरान के खिलाफ अत्याचारों के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का बजट आवंटित करने के बजाय यहूदी शासन को ईरान की चौंकाने वाली प्रतिक्रिया के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए दसियों हजार बिलियन डॉलर की फंडिंग पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

ईरान पर हमला करने के लिए इजरायल ने बढ़ाया बजट!

दरअसल, इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया था कि इजरायल ने ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला करने की तैयारी के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की फंडिंग को मंजूरी दी थी। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि इस बजट को लड़ाकू विमान और खुफिया जानकारी एकत्र करने के साथ ही भूमिगत हथियार केंद्रों पर हमले के लिए हथियारों को बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा।

ईरान से प्रतिबंध हटाने के खिलाफ इजरायल

एस्लामी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। नफ्ताली बेनेट ने कहा था कि इजरायल विश्व की शक्तियों के परमाणु समझौते को लेकर ईरान के ऊपर से प्रतिबंध हटाने की आशंका को लेकर चिंतित है। उन्होंने शनिवार को कैबिनेट की बैठक में कहा कि हम अमेरिका और बाकी देशों के साथ अपनी चिंताओं को साझा कर रहे हैं।

अगले साथ अप्रैल में फिर शुरू होगी वार्ता

ईरान के साथ परमाणु समझौते को लेकर ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में अगले साल अप्रैल में फिर से बातचीत शुरू होने की संभावना है। ज्वाइंट कंपरिहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन के नाम वाले इस समूह में चीन, फ्रांस,जर्मनी,रूस और यूके शामिल हैं। अमेरिका भी अपने पर्यवेक्षकों को इस बैठक में ऑब्जर्वर्स के रूप में भेजने को तैयार है।

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