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स्टेट पॉवर कंपनी का इंटरनल ऑडिट:बिजली बिलों में 7 करोड़ का घपला तो पकड़ा ही,

रायपुर राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने 5-6 वर्षों के दौरान बिजली बिलों में बड़े पैमाने पर की जा रही गड़बड़ी पकड़ी है। कंपनी ने इंटरनल ऑडिट में ...

रायपुर

राज्य विद्युत वितरण कंपनी ने 5-6 वर्षों के दौरान बिजली बिलों में बड़े पैमाने पर की जा रही गड़बड़ी पकड़ी है। कंपनी ने इंटरनल ऑडिट में 7 करोड़ रुपए का घपला निकाला है। इसमें 4.70 करोड़ रुपए वसूले जा चुके हैं। गड़बड़ियां सिर्फ बिजली बिलों में नहीं बल्कि घरेलू मीटर से लेकर ट्रांसफार्मर तक पकड़ी गई हैं। विद्युत नियामक आयोग ने सालाना आडिट में इन गड़बड़ियों को पकड़ते हुए कंपनी को रिकवरी करने के निर्देश दिए थे।


कंपनी ने कार्रवाई के लिए दर्जनभर अफसरों की टीम बना दी है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार बिजली बिलों में गड़बड़ी के पीछे एक बड़ा गठजोड़ है। इसमें कंपनी के लाइनमैन से लेकर बैंक कर्मचारी भी लिप्त रहें हैं। जांच के दौरान खुलासा हुआ कि उपभोक्ता अपना बिल जमा कर रहे हैं, बैंक रिसीप्ट में भी राशि दिख रही है लेकिन वह रकम वितरण कंपनी के एकाउंट में जमा नहीं हो रही थी।

यही नहीं, कुछ उपभोक्ता खासकर राज्य के सरकारी विभाग के लोग,विद्युत अमले से सांठगांठ कर बिल राशि कम करवा रहे हैं। इससे भी कंपनी को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा था। एेसी गड़बड़ियां प्रदेश के तीन जिलों में बिलासपुर, राजनांदगांव और चांपा-जांजगीर में अधिक मिलीं।

इससे कंपनी को करीब 7 करोड़ की रेवेन्यू कम मिल रही थी। इसे पकड़ने कंपनी ने आटोमेटिक सेप सिस्टम के साथ अपने अफसरों की एक बड़ी टीम बनाकर सघन पड़ताल की थी। इसमें उपभोक्ता के घर से ट्रांसफर तक बिजली की सप्लाई और खपत की पड़ताल की गई। बताया गया है कि अब तक लगभग 7 करोड़ रूपये की अनियमिततायें राजनांदगांव, मस्तुरी, बिलासपुर के तिफरा जोन, नेहरूनगर जोन, मल्हार, पचपेड़ी, शिवरीनारायण में संज्ञान में आई है, जिसमें से 4.70 करोड़ रूपए वसूल कर लिए गए हैं। एक प्रकरण में तो बैंक की जमा पर्ची के माध्यम से लगभग 2.3 करोड रुपए का बकाया उजागर हुआ है। मामला अभी पुलिस के पास है जिसमें बैंक और विद्युत मंडल के एक-एक कर्मचारी की मिलीभगत सामने आई हैं।

5 साल तक पुरानी गड़बड़ी

अधिकांश बड़ी अनियमितताएं 3 से 5 साल पुरानी है। इनमें से 2018-19 में 1.82 करोड़ रूपए, 2019-20 में 2.94 करोड़ रूपए 2020-21 में 1.24 करोड़, वर्ष 2015-16 से 2017-18 के दौरान 43 लाख़ रूपए की गड़बड़ी का खुलासा हुआ था। इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए 6 सहायक अभियंता, 5 कनिष्ठ अभियंता, 15 कार्यालय सहायक एवं 13 अन्य कर्मचारियों को निलंबित कर डीई भी की जा रही है।

सैप से की जा रही बिलिंग

कंपनी में सेप ईआरपी सिस्टम में बिलिंग की जाती है जिसमें यह सुविधा है कि हर बिलिंग ट्रांजेक्शन आटोमेटिक तौर पर सर्वर में यूजर आई डी के साथ दर्ज हो जाती है जिससे वित्तीय अनियमितताएं आसानी से पकड़ी जा सकती है। साथ ही इस इंटरनल आडिट के लिए 16 अधिकारियों के दल भी तैनात किया गया है जो 2015 से लेकर आज तक हर बिल का आडिट कर रहे हैं। कंपनी से ऐसे अनियमितता करने वाले उपभोक्ताओं से मूल बिल के साथ जुर्माना लगाते हुए राशि वसूल कर ही है।

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